सन्त बगसा जी की वाणी
[ बेकरी ]
थाँने सतगुरु हेला मारिया रे,
सूतोड़ा जगावे
थाकै दाय पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे ।
दे भायाँ घर को काँई बैठबो रे
मति मान घटाने मान घटेलो
आपको कर्महीन कहावे रे
भायां खेती देखर बाईजे,
मति बीज गमावे बीज गमेलो
आपकोथारे हाथ नी आवे रे ।
नर डोढ़ी बान्धे पागड़ी रे,
छाया निरखे चार दिना रो
बाँधवो रे जातो रहेगो रे
श गाँव खण्डेला साँकड़ी रे,
खाती 'बगसो' जी गावे
छोडा छोले लाड़लो रे,
वाणी अणभे भाखे रे