सन्त कबीर साहब जी की वाणी
[ बेकरी ]
मालिक ने भजो गिंवारा,
कोई भूल्यो तू बारम्बारा ।
जनम लिया जाने मरणा,
साहिब आगे लेखो भरणा टेर।
बाजीगर डंक बजाया,
जद खलक तमाशे आया ।
बाजीगर कला रे समेटी,
जद आप अकेला रेसी । १
धने पान, फूल, फल चाहिए,
तो बेल सींचतो रहिये।
बेलड़ियों रे फल लागे जद
जनम-मरण भी भागे । २
दरशण करणा चहिये तो
दर्पण मांजतो रहिये
दर्पण में व्हेला काँई तो
थने दरशण व्हेला नाहीं । ३ ।
जावड़ियो पार लगावे थनै
अमरलोक ले जावे
पार उतरणो चहिये तो
नावाड़ियाँ सूं मिलतो रहिये 4
कहत 'कबीर' सा वाणी,
जाणी सोई पिछाणी।
जाण्या नहीं पतिजे तो
मूरख ने कांही कीजे । ५