Tuesday, June 9, 2026

संकटमोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रबि भक्षि लियो तब
 तीनहुँ लोक भयो अँधियारो ।
 ताहि सों त्रास भयो जग को यह
 संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब
 छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो ।
 को नहिं जानत है जगमें कपि
 संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥


 बालि की त्रास कपीस बसै गिरि
 जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
 चौंकि महा मुनि साप दियो तब
 चाहिय कौन बिचार बिचारो ।
 कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु
 सो तुम दास के सोक निवारो ।
 को नहिं जानत है जगमें कपि
 संकटमोचन नाम तिहारो ॥ २ ॥

 अंगद के सँग लेन गये सिय
 खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु
 बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो ।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब
 लाय सिया सुधि प्रान उबारो ।
को नहिं जानत है जगमें कपि
 संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ३ ॥


 रावन त्रास दई सिय को सब
 राक्षसि सों कहि सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु
 जाय महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय असोक सों आगि सु
 दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो ।
 को नहिं जानत है जगमें कपि
 संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ४ ॥

 बान लग्यो उर लछिमन के तब
 प्रान तजे सुत रावन मारो ।
 लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै
 गिरि द्रोन सु बीर उपारो ।
 आनि सजीवन हाथ दई तब
 लछिमन के तुम प्रान उबारो ।
को नहिं जानत है जगमें कपि
 संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ५ ॥


 रावन जुद्ध अजान कियो तब
 नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल
 मोह भयो यह संकट भारो ।
आनि खगेस तबै हनुमान जु
 बंधन काटि सुत्रास निवारो ।
को नहिं जानत है जगमें कपि
 संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ६ ॥

 बंधु समेत जबै अहिरावन
 लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि
 देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो ।
जाय सहाय भयो तब ही
 अहिरावन सैन्य समेत सँहारो ।
 को नहिं जानत है जगमें कपि
 संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ७ ॥

 काज किये बड़ देवन के तुम
 बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को
 जो तुमसों नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु
 जो कछु संकट होय हमारो ।
 को नहिं जानत है जगमें कपि
 संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ८ ॥

 दोहा
 लाल देह लाली लसे अरू धरि लाल लँगूर ।
बज्र देह दानव दलन जय जय जय कपि सूर ॥

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 ॥ इति गोस्वामि तुलसीदास कृत
संकटमोचन हनुमानाष्टक सम्पूर्ण ॥